In Hindi Full Updated | Palitana 5 Chaityavandan

इस पावन गिरिराज पर रायन वृक्ष के नीचे विराजमान आदिनाथ प्रभु के चरण कमलों की मैं वंदना करता हूँ Tattva Gyan। माता मरुदेवा के लाल आदिनाथ भगवान का यह परम पावन तीर्थ है। जो जीव इन चरणों की भाव से पूजा करता है, वह परम आनंद (मोक्ष) को प्राप्त करता है।

(इसके बाद १ लोगस्स का काउस्सग्ग और नमोत्थुणं का पाठ करें)

भगवान आदिनाथ के प्रथम गणधर 'पुंडरीक स्वामी' थे। उन्होंने इसी पर्वत पर ५ करोड़ मुनियों के साथ मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण इस पर्वत का नाम 'पुंडरीक पर्वत' भी है। मुख्य मंदिर के सामने ही पुंडरीक स्वामी का जिनालय है।

पलिताना के ५ चैत्यवंदन में निम्नलिखित पाँच मंदिर शामिल हैं: palitana 5 chaityavandan in hindi full

चोरासी लाख पूर्व की, जिसकी आयु विशाल।" Tattva Gyan

पलिताना के ५ चैत्यवंदन एक अद्वितीय तीर्थ यात्रा है, जो जैन धर्म के श्रद्धालुओं के लिए बहुत महत्व रखती है। इस अनुष्ठान को करने से श्रद्धालुओं को अपने जीवन में शांति और सुख प्राप्त होता है, और वे जैन धर्म के मूल्यों और आदर्शों के प्रति जागरूक होते हैं। यदि आप जैन धर्म के श्रद्धालु हैं या आप पलिताना की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो ५ चैत्यवंदन को जरूर करें।

शांतिनाथ मुख मंडप सोहे, देखत भविजन ना मन मोहे।तीसरे तीर्थंकर सुखकारी, शांति करो प्रभु जगत मोझारी।हस्तिनापुर के तुम हो राजा, सारो सेवक ना सब काजा।विघ्न हरन तुम नाम तुम्हारा, वंदूं चरण कमल तिहारा। palitana 5 chaityavandan in hindi full

(इसके बाद १ लोगस्स का काउस्सग्ग और नमोत्थुणं बोलें)

'चैत्यवंदन' शब्द दो भागों से मिलकर बना है: और वंदन । चैत्य का अर्थ है जिन मंदिर या मूर्ति, और वंदन का अर्थ है प्रणाम करना या स्तुति करना। अतः चैत्यवंदन का तात्पर्य जिन मंदिरों और मूर्तियों की विधिपूर्वक वंदना करना है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, चैत्यवंदन करने से आत्मा में शुभ भावों का उदय होता है, जिससे कर्मों का क्षय होता है और अंततः कल्याण की प्राप्ति होती है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें मन से ध्यान, वचन से स्तुति और काया से पूजा शामिल है। यह विधि जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय में विशेष रूप से प्रचलित है।

का जाप करें।

3. तृतीय चैत्यवंदन: रायण पगला (रायण वृक्ष के नीचे)

विमल सुजस जग प्रगट कीनो, सिद्ध अनंता ध्यान ही दीनो।शत्रुंजय गिरिवर सुखकारी, वंदूं चरण कमल बलिहारी।

2. दूसरा चैत्यवंदन: चंवर ढोलय (Chanvar Dholay) palitana 5 chaityavandan in hindi full

यह चैत्यवंदन यात्रा की शुरुआत में तलहटी (शत्रुंजय पर्वत के नीचे) में किया जाता है।